यह हिस्सा युहन्ना के शागिर्दों को दिए गए 'ईसा के जवाब का कहानी है।
इस लफ़्ज़ का जवाब यह दिखाने के लिए है कि यह एक कहानी कि शुरूवात है। अगर आपकी ज़बान में किसी कहानी को शुरू'करने का इंतज़ाम है तो उसका इस्ते'माल करें। इसका तर्जुमा हो सकता है, "तब"या"इसके बा'द"
इस लफ़्ज़ का तर्जुमा"ता'लीम"या"हुक्म"भी हो सकता है।
'ईसा के बारह मुन्तखब शागिर्द।
"उस वक़्त"इसको छोड़ा जा सकता है।(देखें यू.डी.बी.)
इख़्तियारी तर्जुमा"युहन्ना जो क़ैदखाना में था,उसने सुना कि"या"किसी ने युहन्ना को क़ैदखाने में इसके बारे में बताया"।
युहन्ना ने अपने शागिर्दों को पैग़ाम के साथ'ईसा के पास भेजा।
उससे"इसमें ज़मीर ईसा के लिए काम में लिया गया है
"उम्मीद करें"यहाँ जमीर"हम"सिर्फ़ युहन्ना और उसके शागिर्दों के लिए नहीं है लेकिन सब यहूदियों के लिए है।
इसके साथ ही युहन्ना के शागिर्दों को दिया गया 'ईसा का जवाब ख़त्म होता है।
"युहन्ना को सुना दो"।
'ईसा भीड़' से युहन्ना बपतिस्मा देने वाले के बारे में गुफ़्तगू करता है।
'ईसा इस जुमलों को तीन सवालो में ज़ाहिर करता है कि लोग सोचें कि युहन्ना कैसा इन्सान था। इसका तर्जुमा इस तरह किया जा सकता है, "क्या तुम देखने गए थे कि...?हरगिज नहीं"। या"यक़ीनन ही तुम...देखने नहीं गए थे"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-rquestion)
इसका मतलब हो सकता है(1)यरदन नदी के किनारे पर उगने वाले पौधे(देखें यू.डी.बी.)या(2)इन्सान के लिए एक मिसाल, "एक इन्सान जो सरकण्डे के तरह हवा में हिलता था"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-simile)इस तशबीह के दो मुमकिन मतलब हैं,ऐसा इन्सान(1]])हवा के ज़रिए'आसानी से हिलाया जा सकता है,आसानी से ख्याल बदलने वाला इन्सान,या(2]])हवा चलने पर बहुत आवाज करता है,अहमियत की बात तो कम पर बेमतलब की बातें ज़्यादा करने वाला, (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)
एक लम्बी घास
"मंहगे कपड़े पहने हुए"दौलतमन्द लोग ऐसे कपड़े पहनते थे।
इस लफ़्ज़ का तर्जुमा अक्सर"देखो"किया जाता है कि आने वाली बात पर ज़ोर दिया जाए। इख़्तियारी तर्जुमा होगा, "यक़ीनन ही"
'ईसा युहन्ना भीड़' से बपतिस्मा देने वाले ही की गुफ़्तगू करता है।
यहाँ भी युहन्ना बपतिस्मा देने वाले से मुत'अल्लिक़ सवालों का तरतीब चल रहा है।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-rquestion)
यहाँ इसमें जमीर जमा'में है और भीड़'के लिए है।
"एक'आम नबी को नहीं",या"एक'आम नबी से भी ज़्यादा ख़ास इन्सान को"
"यह"या'नी युहन्ना बपतिस्मा देने वाला।
यहाँ"जिसके"वह हवाला अगले जुमले में"अपने फरिस्ते"से कि है।
'ईसा नबी मलाकी का मिसाल देते हुए कह रहा है युहन्ना वही फरिस्ता है जिसकी गुफ़्तगू मलाकी की किताब में की गई है MAL 3:1।
यहाँ इसमें ज़मीर"मैं"ख़ुदा के लिए काम में लिया गया है। पुराने अहद नामा की नबुव्वत का मुसन्निफ़\ख़ुदा के लफ़्ज़ो को जैसा है वैसा ज़ाहिर करता है।
"तेरे सामने"या"तुम से आगे चलने के लिए"यहाँ"तेरे"एक कलाम में है क्योंकि ख़ुदा मसीह से बातें कर रहा है।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-you)
'ईसा युहन्ना भीड़' से बपतिस्मा देने वाले ही की गुफ़्तगू करता है।
"जितनों को'औरतों ने पैदा किया है,"उनमें या"जितने इन्सान अब तक रहे हैं उनमें" (देखें यू.डी.बी.)
इख़्तियारी तर्जुमा"युहन्ना सबसे बड़ा है"।
जिस बादशाही की ख़ुदा कायम करेगा उसके एक हिस्सा में इख़्तियारी तर्जुमा होगा, "जो आसमान कि बादशाही में दाख़िल करेंगे"
"वह युहन्ना से भी ज़्यादा ख़ास हैं।"
"जब से युहन्ना ने ऐलान करना शुरू'किया है"
इसका मुमकिन मतलब हैं(1)मुखाल्फिन वहाँ बेरोक टोक बर्ताव करते हैं(देखें यू.डी.बी.)या(2)इन्सान आसमान के बादशाही की कौम को सताते है,या(3)आसमान के बादशाही ज़ोर के साथ बढ़ रहा है और ताक़तवर लोग उसमें दाख़िल करना चाहते हैं।
'ईसा युहन्ना भीड़' से बपतिस्मा देने वाले ही की गुफ़्तगू करता है।
शरी'अतमूसा की शरी'अत
युहन्ना,युहन्ना बपतिस्मा देनेवाला।
यह भीड़'के बारे में है।
"यही"या'नी युहन्ना बपतिस्मा देनेवाला,यह जुमला अलामती मिसाल है कि युहन्ना बपतिस्मा देने वाला पुराने अहद नामें में की गई एलिय्याह की नबुव्वत की तकमील है लेकिन वह यह नहीं कहता कि युहन्ना बपतिस्मा देने वाला ही एलिय्याह है।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metonymy /'अलामती इस्ते'माल)
कुछ ज़बानों में दुसरे मर्द काम में लेना ज़्यादा अच्छा होगा।"सुनने के लिए तुम्हारे पास काम हों तो सुन लो"।(देखें /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-123person /पहला,दूसरा,दीगर मर्द।)
"जो सुन सकता है“ या"जो भी मेरी बात सुनता है"
"वह तवज़्ज़ह से सुन ले"या"वह मेरी बात पर तवज़्ज़ह दे"।
'ईसा युहन्ना भीड़' से बपतिस्मा देने वाले ही की गुफ़्तगू करता है।
यह सवाल का शुरू'है।'ईसा इससे अपने ज़माने के इन्सानों की मुक़ाबले करना शुरू'करता है और बाजार में बैठे हुए बच्चों से करता है। वह सवाल पूछ कर शुरू'करता है(देखें /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-rquestion)
इस तशबीह का मतलब हो सकता है(1) 'ईसा ने बाँसुली बजाई और युहन्ना ने ”मातम किया“ लेकिन ”इस नस्ल न तो नाची और न नौहा किया,हुक्म मानने की तनक़ीद की कि वे शरी'अत का पालन नहीं करते। शरी'अत में जोड़े गए उनके अपने कानून(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-simile, /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)
"आज जो लोग हैं",या"ये लोग",या"इस नस्ल के तुम लोग" (देखें यू.डी.बी.)
यह एक खुला मैदान होता या जहाँ ताजिर अपना सामान बेचने आते थे।
"हमने"या'नी बाजार में बैठे बच्चे"तुम्हारे"या'नी वह नस्ल या वह भीड़'जो गीत सुनकर रद्दे'अमल नहीं दिखाता है।
यह एक लम्बा खोखला बजने वाला सामान\है जिसे एक सिरे से फूंक कर बजाया जाता था।
"लेकिन तुम गीत के मुताबिक़ नहीं नाचे"
"तुम हमारे साथ रोए नहीं"
'ईसा भीड़' से युहन्ना की गुफ़्तगू ख़त्म करता है।
"खाना नहीं खाता था", "अक्सर रोज़ा रखता था"या'आम तौर अच्छा खाना नहीं खाता था(यू.डी.बी.)इसका मतलब यह नहीं कि युहन्ना खाना ही नहीं खता था।
'ईसा युहन्ना के बारे में लोगों की बातों का मिसाल दे रहा है इसका तर्जुमा तिरछी जुमला में किया जा सकता है, "वे कहते हैं कि उसमें बदरुह है"या"वे उस पर बदरुह होने का इल्ज़ाम लगाते हैं।" (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-quotations)
"वे"या'नी वह नस्ल(आयत16)
क्योंकि'ईसा उन लोगों से उम्मीद करता था कि वे उसे पहचान लें कि वह इन्सान का बेटा है,लिहाजा इसका तर्जुमा किया जा सकता है, "मैं,इन्सान का बेटा"।
'ईसा लोगों की बातों का मिशाल दे रहा है कि वे उसके या'नी इन्सान के बेटा के बारे में क्या कहते हैं। इसका तर्जुमा तिरछी जुमला में किया जा सकता है, "वे कहते हैं कि वह पेटू इन्सान है",या"वे उस पर खाते रहने का इल्ज़ाम लगाते हैं।"अगर आप"इन्सान का बेटा"का तर्जुमा"मैं,इन्सान का बेटा"करते हैं तो तिरछी मिशाल को तर्जुमा इस तरह किया जा सकता है, "वे कहते हैं कि मैं खाऊ इन्सान हूँ"।
"वह खाने का लालची है"या"वह खसलत से ही बहुत खाता है"।
"शराबी"या"बहुत शराब पीने वाला"
यह मुमकिन है एक अम्साल है जिसे'ईसा इस हालात में मूत'अल्लिक़ बना रहा है क्योंकि जिन इन्सानों ने'ईसा को और युहन्ना को क़ुबूल नहीं किया वे अक़लमंद नहीं हैं। इसका तर्जुमा मुन्तख़ब जुमला में किया जा सकता है जैसा यू.डी.बी.में है।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)
अक़लमंद को इंसानी सक्ल देने की इस ज़ाहिर का मक़सद यह नहीं कि अक़लमंद ख़ुदा के सामने मुनासिब ठहरे लिकिन इस मक़सद में कि वह सच्चा ठहराया जाता है।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-personification))
"अपने"जमीर लफ़्ज़ के इन्सानियत के बारे में है।
'ईसा उन शहरों की तनक़ीद करना शुरू' करता है जहाँ उसने पहले मो'जिज़े किए थे।
'ईसा'अलामाते इस्ते'माल के ज़रिए'उन शहरों के रहने वालो को गलत काम के बारे में ठहराते हैं।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metonymy)
शहरी'एलाक़ा
इसका तर्जुमा मुनतख़ब काम के ज़रिए'किया जा सकता है।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)
इसका तर्जुमा किया जा सकता है, "मो'जिज़े"या"ताक़त ज़ाहिर के काम"या"मो'जिज़े" (यू.डी.बी.)
"उन्होंने"उन लोगों के बारे में है जिन्होंने उन शहरों में तोबा नहीं किया था।
'ईसा इस तरह बोल रहा है कि जैसे खुराजीन और बैतसैदा के रहने वाले सुन रहे हों लेकिन वे वहाँ नहीं हैं।
इन शहरों के नामों का'अलामत इस्ते'माल किया गया है जो हक़ीक़त में उनके रहने वालो के बारे में है।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metonymy)
इसका तर्जुमा मुन्तख़ब जुमलो में किया जा सकता है, "अगर मैं सूर और सैदा में मो'जिज़े दिखाता" (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)
यहाँ वाहिद काम में लिया गया है।
"वे"इस्मे जमीर सूर और सैदा के लोगों के बारे में है।
"वे गुनाहों का दुःख ज़ाहिर करते“
"इन्साफ़ के दिन ख़ुदा तुम्हारी उम्मीद सूर और सैदा पर ज़्यादा रहम दिखाएगा"या"ख़ुदा,इन्साफ़ के दिन तुम्हें सूर और सैदा के रहने वालो से ज़्यादा सज़ा देगा" (देखें यू.डी.बी.)यहाँ जुडी हुई'इल्म है, "क्योंकि तुमने दिल फिराकर मुझमें ईमान नहीं किया है जबकि तुमने तो मेरे मोजज़ों को देखा है"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-explicit) )
तेरी"इस्मे जमीर एक कलाम में है और खुराजीन या बैतसैदा के लिए काम में लिया गया है
'ईसा उन शहरों के मुखालफ़त में ही कह रहा है जिसमें उसने पहले मोजिज़े दिखाए थे।
अब'ईसा कफ़रनहूम के रहने वालो को ख़िताब कर रहा है जैसे कि मानों वे सुन रहे हैं लेकिन वे सुन नहीं रहे हैं।(देखें /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-apostrophe/) "तू"इस्मे जमीर यहाँ वाहिद में है और इन दोनों आयतों में हर जगह कफ़रनहूम का'इल्म कराता है।
इन शहरों कें नाम'अलामती इस्ते'माल हैं जिसका मतलब है वहाँ के रहने वाले(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metonymy/अलामती इस्ते'माल)
इस सवाल के ज़रिए' 'ईसा कफ़रनहूम के रहने वालो को उनके फ़ख़्र के लिए झिड़कता है।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-rquestion)इसका तर्जुमा मुन्तख़ब जुमले में किया जा सकता है, "क्या तू आसमान तक जायेगा"?या"क्या तू सोचता है कि ख़ुदा तुझे ‘इज़्ज़त देगा"?
ऊँचा किया जायेगा "नवाज़ा किया जायेगा" (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-idiom //मुहावरे)
ए बरज़ख तक नीचे जायेगा। इसका तर्जुमा मुन्तख़ब जुमले में किया जा सकता है, "ख़ुदा तुझे'आलम ए बरज़ख में गिराएगा"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)
जो क़ुदरत के काम तुझ में किए गए हैं,अगर सदोम में किए जाते इसका तर्जुमा मुन्तख़ब में किया जा सकता है, "अगर मैं उन ताक़तवर कामों को करता जो मैंने तुझ में किए हैं"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)
ताक़त के काम, "बड़े बड़े काम", "ताक़त ज़ाहिर के काम"या"मो'जिज़े"।(यू.डी.बी.)
"वह"इस्में जमीर सदोम का'इल्म कराता है।
इसका तर्जुमा हो सकता है, "इन्साफ़ के दिन ख़ुदा तेरी बदले सदोम को ज़्यादा रहम दिखाएगा"या"इन्साफ़ के दिन ख़ुदा तुझे सदोम के रहने वालो से ज़्यादा सज़ा देगा" (देखें यू.डी.बी.)यहाँ सलंग्न'इल्म है, "क्योंकि तूने तोबा करके मुझ पर ईमान नहीं किया है जबकि तूने मेरे मो'जिज़े देखे हैं"।(देखें /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-explicit /ज़ाहिर और छुपी हुई'इल्म)
भीड़' के बीच रहते हुए 'ईसा आसमानी बाप से मिन्नत करता है।
इसका मतलब हो सकता है, (1) 10:05/10:5में'ईसा ने जिन शागिर्दों को भेजा था वे लौट आए(देखें12:01/12:1)और'ईसा उनमें से किसी की बात पर फ़िर काम दिखा रहा है या(2) 'ईसा उन तोबा करने वाले शहरों के इल्ज़ाम का तकमील कर रहा हैः उसी वक़्त'ईसा ने कहा।
हे बाप,यह बाप ख़ुदा है न कि उसका दुनियावी बाप।
इसका तर्जुमा ‘अलामती इस्ते'माल जैसे किया जा सकता है, "आसमान और ज़मीन की सब चीजों के मालिक"या जैसे"दुनिया के मालिक", (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metonymy /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-merism)
"इन बातों"से'ईसा का मतलब क्या था वाज़ेह नहीं है। अगर आपकी ज़बान में इसका मतलब वाज़ेह करने की ज़रूरत पड़े तो इख़्तियारी तर्जुमा बेहतर होगा, "तूने अंजान पर उस सच्चाई का मुकासफ़ा किया है जो तूने'अक़लमंद और समझदारों को सीखने नहीं दिया"।
यह काम"ज़ाहिर"का ख़ास लफ़्ज़ है।
"जो इन्सान'’इल्म वाला और समझदार हैं"इसका इख़्तियारी तर्जुमा है, "अपने आपको'’अक़लमंद और समझदार मानने वाले"।(देखें यू.डी.बी., /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-irony)
"उन बातों को ज़ाहिर किया।"
मुकम्मल जुमला में एक लफ़्ज़ का तर्जुमा किया गया है जिसका मतलब है, "छोटे बच्चे", "मा'सुम या"नासमझ",इसका इख़्तियारी तर्जुमा है, "मा'सुम छोटे बच्चे"।
बच्चा,यह उन लोगों के लिए तशबीह का इस्ते'माल है जो अपने आप को'अक़लमंद और ज़्यादा ता'लीम नहीं समझते हैं।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-simile))
"क्योंकि तूने देखा कि ऐसा करना अच्छा है"।
इसका तर्जुमा मुन्तख़ब काम से किया जा सकता है, "मेरे बाप ने सब कुछ मुझे सौंप दिया है"या"मेरे बाप ने सब कुछ मेरे हाथों में कर दिया है"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive) )
"सिर्फ़ बाप ही बेटा को जानता है"।
जाती तजुर्बा से जानता है।
'ईसा अपने आप के दुसरे मर्द के सक़ल में ज़ाहिर कर रहा है।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-123person)
सिर्फ़ बेटा ही बाप को जानता है।
"जाती"तजुर्बा से जानता है।
इख़्तियारी'तर्जुमा"इन्सान बाप को तब ही जान सकता है जब सिर्फ़ बेटा बाप को उस पर ज़ाहिर करना चाहे"।
"उसे"बाप ख़ुदा के लिए काम में लिया गया इस्मे ज़मीर है।
'ईसा भीड़' में बातें करना ख़त्म करता है।
यह मिसाल यहूदियों की शरी'अत में जूए कि मिसाल देता है(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)
"मैं तुम्हें तुम्हारे मेहनत और बोझ से आराम करने दूँगा"।
इस आयत में इस्मे ज़मीर"अपने", "सब मेहनत करनेवालों और बोझ से दबे हुए लोगों"का'इल्म कराता है। इस मिसाल का मतलब है, "जो काम मैं तुम्हें दूं उसे क़ुबूल कर लो", (देखें यू.डी.बी.)या"मेरे साथ काम करो"।
यहाँ"आसन"लफ़्ज़ सख़्त का मुत्जाद लफ़्ज़ है।