यहाँ 'ईसा के ज़रिए' शागिर्दों को ख़िदमत में भेजने का सब हाल शुरू' होता है।
"अपने बारह शागिर्दों को जमा'किया"
यक़ीन करें कि तर्जुमा में यह इख़्तियार वाज़ेह हो(1)नापाक रूहों को निकालना और(2)बीमारों और कमज़ोरों को शिफ़ा करना।
नापाक रूहों को निकाले
"हर तरह की बीमारी और कमज़ोरी", "बीमारी"और"कमज़ोरी"मुत'अल्लिक़ लफ़्ज़ है लेकिन मुमकिन हो तो इन्हें दो अलग अलग लफ़्ज़ो में ही तर्जुमा करना है।"बीमारी"इन्सान को बीमार बनाती है। कमज़ोर जिस्म की ख़राबी या तकलीफ़ है जो बीमारी के नतीजा जैसे होती है।
'ईसा के ज़रिए' अपनी ख़िदमत के ख़ातिर बारह शागिर्दों को भेजने का सब हाल ही चल रहा है जिसका शुरू' MAT 10:1 में हुआ था।
तरतीब में न कि'उहदा में।
इसके मुमकिन मतलब हैं(1) "जेलोतेस"या(2) "जोशीला"। जेलोतेस का मतलब है कि वह उस'मजलिस का मेम्बर था जो यहूदियों को रोमी सल्तनत से आज़ाद करना चाहते थे। इख़्तियारी तर्जुमा"वतन परस्त"या"कौम परस्त"या"आज़ाद फ़ौजी"। दूसरा मतलब, "जोशीला"से समझ में आता है कि वह ख़ुदा के इह्तराम के लिए जोशीला था,इसका इख़्तियारी तर्जुमा हो सकता है, "उत्साही"।
"मत्ती जो महसूल लेनेवाला था"।
"जो'ईसा के साथ धोखा करेगा"।
'ईसा के ज़रिए' अपनी ख़िदमत के ख़ातिर बाहर शागिर्दों के भेजने का सब हाल चल रहा है।
"'ईसा ने इन बारह शागिर्दों को भेजा",या"'ईसा ने जिन बारहों शागिर्दों को भेजा वे ये हैं"।
'ईसा ने इन बारहों को एक ख़ास मक़सद से भेजा था।"भेजा" "रसूल"की काम कि शक्ल है जिस लफ़्ज़ का इस्ते'माल MAT 10:2 में किया गया है।
'ईसा ने यह हुक्म देकर,"उसने उन्हें कहा कि उन्हें क्या करना होगा"इसका तर्जुमा इस तरह भी हो सकता है, "उसने उन्हें हुक्म दिया"।
यह एक मिसाल है जो इस्राईल मुल्क का मुक़ाबले ऐसी भेड़ों से करता है जो चरवाहे से अलग होकर भटक गई हैं।(देखें यू.डी.बी.) (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor /मिसाल)
यह हिदायत इस्राईली क़ौम से मुत'अल्लिक़ है। इसका तर्जुमा इस तरह किया जा सकता है, "इस्राईलियों"या"इस्राईल वालों" (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metonymy)
चलते यह बारह शागिर्दों के बारे में है।
इसका तर्जुमा आप वैसे ही करेंगे जैसे आपने इस ख़याल का तर्जुमा MAT 3:2 में किया है।
'ईसा के ज़रिए' अपने ख़िदमत के काम की ख़ातिर बारह शागिर्दों को भेजने का सब कहानी ही चल रही है जिसका शुरू' MAT 10:1 में हुआ है।
या'नी बारह हौसला अफज़ाई(शागिर्द)
"सोना,चाँदी,ताँबा कुछ नहीं रखना"।
"हासिल करना", "क़ुबूल करना"या"लेना”
ये वे धातु थी जिनसे सिक्के बनते थे। यह पैसों के लिए'अलामती तौर पर इस्ते'माल है। अगर आपके लिए ये धातएं अनजान है तो इनका तर्जुमा"पैसा"करें।(यू.डी.बी.)
कमर बन्द का मतलब है"पैसा रखने वाले कमरबंध"या इससे मुराद पैसा रखने की थैली से भी हो सकता है।"कमर बन्द"कमर में बांधने का कपड़े या चमड़े का पट्टा होता था। वह काफी चौड़ा होता था कि अगर उसे मोड़ लें तो उसमें पैसा रखा जा सकता था।
झोली,सफ़र में बराबर लेकर चलने के लिए थैला या खाना या पैसा मांगने के लिए झोली।
यहाँ कुरते के लिए वही लफ़्ज़ काम में ले जो MAT 5:40 में काम में लिया गया है।
"काम करनेवाले"
"ज़रूरत की चीज़ें"
'ईसा के ज़रिए' अपने ख़िदमत के काम की ख़ातिर बारह शागिर्दों को भेजने का सब तफ़सील ही चल रही है जिसका शुरू' MAT 10:1 में हुआ है।
यह ज़मीर रसूलों के लिए काम में लिया गया है।
जिस किसी शहर या गाँव में आओ, "जब किसी शहर या गाँव में दाख़िल करो",या"उस हर एक शहर या गाँव जिसमें तुम दाख़िल करो"।
"बड़ा गाँव....छोटा गाँव"या"बड़ा शहर....छोटा शहर"ये लफ़्ज़ वही हैं जिसको MAT 9:35 में काम में लिया गया है।
"उसी इन्सान के घर में रहना जब तक कि शहर या गाँव से रवानगी न करो"।
"घर में दाख़िल करते ही वहाँ रहनेवालों को बरकत देना"। उस वक़्त का रिवायती बरकत थी, "इस ख़ानदान को इत्मीनान मिले"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metonymy)
"अगर उस घर के लोग तुम्हारा अच्छा इस्तक़बाल करें" (यू.डी.बी.)या"उस घर के लोग तुम्हारे साथ अच्छा सुलूक करें"।(देखें /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metonymy)
"उन्हें इत्मीनान मिलेगा"या"उस घर के लोग इत्मीनान में जिएंगे"।(देखें:यू.डी.बी.)
वह इत्मीनान जिसके लिए रसूल ख़ुदा से मिन्नत करें कि वह उस ख़ानदान को दे।
"अगर वे तुम्हारा अच्छा इस्तक़बाल न करें" (यू.डी.बी.)या"अगर वे तुम्हारे साथ अच्छा सुलूक न करें"।
इसका मतलब दो में से एक हो सकता है, (1)अगर वह ख़ानदान क़ाबिल न हुआ तो ख़ुदा अपना इत्मीनान या बरकत उस ख़ानदान से रोक लेगा,जैसा यू.डी.बी में इज़हार किया गया है या(2)अगर वह ख़ानदान क़ाबिल न हुआ तो रसूलों से कुछ करने की उम्मीद की गई है,जैसे,ख़ुदा से मिन्नत करना कि उनका मुबारक बाद क़ुबूल न करे। अगर आपकी ज़बान में बरकत को वापस लेने का या उसके असर को बेकार करने का लफ़्ज़ है,जो उसे काम में लें।
'ईसा के ज़रिए' अपने ख़िदमत काम के ख़ातिर बारह शागिर्दों को भेजने का सब हाल ही चल रहा है जिसका शुरू' MAT 10:1 में हुआ है।
"अगर उस शहर में तुम्हें कोई क़ुबूल न करे या तुम्हारी बातें न सुने।"
या'नी बारह रसूल(शागिर्द)
"तुम्हारा पैग़ाम न सुने" (यू.डी.बी.)या"तुम्हें जो कहना है,न सुने"।
इसका तर्जुमा वैसे ही करें जैसे MAT 10:11 में किया है।
"उस घर या शहर की धूल अपने पैरों में से झाड़ दो"यह एक निशानी है कि ख़ुदा ने उस घर या शहर के लोगों को छोड़ दिया है।(देखें यू.डी.बी.)
दर्द कम होगा।
"सदोम और अमूरा के रहने वाले"जिन्हें ख़ुदा ने आसमान से आग गिराकर राख़ कर दिया था।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metonymy)
जिस शहर के लोग रसूलों को क़ुबूल न करें या उनका पैग़ाम न सुने।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metonymy)
'ईसा अपने बारह शागिर्दों के उस सताव के बारे में गुफ़्तगू करता है जो अपने ख़िदमत के काम को करने की वजह से उन्हें सहना होगा।
"देखो"लफ़्ज़ यहाँ पेशगी गुफ़्तगू पर ज़ोर डालता है इसका इख़्तियारी तर्जुमा होगा, "तवज़्ज़ह दो"या"सुनो"या"जो मैं कहने जा रहा हूँ उस पर तवज़्ज़ह दो"।(देखें यू.डी.बी.)
'ईसा उन्हें एक ख़ास मक़सद की ख़ातिर भेज रहा है।
'ईसा अपने शागिर्दों को जिन्हें वह भेज रहा है उनका मुक़ाबला ग़ैरमहफूज भेड़ों से करता है,जो ऐसी जगह जाएंगी जहाँ उन पर जंगल में जानवरों को हमले का अंदेसा है।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-simile /तशबीह)
ग़ैर महफूज(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-simile)
आप इस तशबीह को वाज़ेह करके कह सकते है, "ऐसे इन्सानों के बीच जो ख़तरनाक भेड़ियें हैं"। या"ऐसे इन्सानों के बीच जो ख़तरनाक जानवरों का सा सुलूक करते हैं",या क़यास इज़हार करें"उन लोगों के बीच जो तुम पर हमले करेंगे।" (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)
यहाँ इस तशबीह को काम में नहीं लेना ही अच्छा है, "समझदारी और इहतियात से काम करना साथ ही साथ अच्छेपन और ख़ूबियों का ज़ाहिर करना"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-simile)
"ख़बरदार रहना क्योंकि वे तुम्हें पकड़वाएंगे"।
"ख़बरदार रहो", "इहतियात रहो",या"इन्तिहाई सोच समझ कर चलना", (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-idiom)
'ईसा के साथ यहूदा ने जो किया उसके लिए यही लफ़्ज़ है(देखें यू.डी.बी.)सही'तर्जुमा"धोखे से पकड़वायेंगे"या"तुम्हें पकड़वायेंगे",या"तुम्हें क़ैदी बनवाकर मुक़दमा चलाएंगे"।
जमा'त ए ख़ास,या'नी मुक़ामी मज़हबी रहबर या जो रहबर क़ौम में इत्मीनान बनाए रखते हैं। इख़्तियारी तर्जुमा है, "अदालतों"।
"कोड़ों से पीटेंगे"।
"तुम्हें लाएंगे"या"तुम्हें घसीटेंगे" (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)
"क्योंकि तुम मेरे हो" (यू.डी.बी.)या"क्योंकि तुम मेरी पैरवी करते हो"।
ज़मीर"उन"से मुराद है"हाकिमों और बादशाहओं"या यहूदी इल्ज़ाम लगाने वाले।
'ईसा अपने शागिर्दों को उनके आने वाले सताव की गुफ़्तगू कर रहा है, इसका शुरू' MAT 10:16 में हुआ है।
"जब इन्सान तुम्हें पकड़वाए"यहाँ वे या'नी इन्सान वही है जो MAT 10:17 में हैं।
इसका तर्जुमा वैसा ही करें जैसा MAT 10:17 में"पकड़वाने"का किया है।
इस मुकम्मल कहानी में"तुम"और"तुम्हारे"का हवाला रसूलों से है।
"परेशान न होना"
"तुम्हें कैसे और क्या कहना है;दोनों ख़्यालों को जोड़ा जा सकता है", "तुम्हें क्या कहना होगा"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-hendiadys)
"उसी वक़्त" (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metonymy)
अगर ज़रुरी हो तो इसका तर्जुमा हो सकता है, "तुम्हारे आसमानी बाप की रूह"या'ओहदे का तबसरा लिखा जाए कि यह ख़ुदा बाप का पाक रूह है,न कि दुनयावी बाप की रूह।
"तुम्हारे ज़रिए'से"
'ईसा अपने शागिर्दों को उनके आने वाले सताव की गुफ़्तगू कर रहा है, इसका शुरू' MAT 10:16 में हुआ है।
भाई को और बाप बेटे को हलाक़त के लिए सौंपेंगे। इख़्तियारी तर्जुमा"भाई भाई को मरवाने के लिए पकड़़वाएगा और बाप अपनी औलाद को मरवाने के लिए पकड़वाएगा"।
इसका तर्जुमा वैसा ही करना होगा जैसा MAT 10:17 में"सौपेंगे"का किया है।
"बग़ावत करेंगे" (यू.डी.बी.)या"ख़िलाफ़ हो जायेंगे"
"उन्हें धोका देंगे"या"हाकिमों के ज़रिए'उन्हें सज़ा ए मौत दिलवाएंगे।"
इख़्तियारी तर्जुमा"सब तुमसे नफ़रत करेंगे"या"इन्सान तुमसे नफ़रत करेंगे"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)
या'नी बारह हौसला अफज़ाई(शागिर्द)
"मेरी वजह"या"क्योंकि तुम मुझमें ईमान रखते हो"।(यू.डी.बी.)
"जो ईमानदार बना रहेगा"।
इख़्तियारी तर्जुमा"ख़ुदा उसे बचा लेगा"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)
"दूसरे शहर में चले जाना"
"पहुँच जायेगा"।
'ईसा अपने शागिर्दों को उनके आने वाले सताव की गुफ़्तगू कर रहा है, इसका शुरू' MAT 10:16 में हुआ है।
यह एक आम हक़ीक़त है न कि किसी शागिर्द ख़ास या उसके उस्ताद के बारे में है। शागिर्द अपने उस्ताद से ज़्यादा ख़ास नहीं होता है। इसकी वजह है कि वह"उस्ताद से ज़्यादा'ईल्म नहीं रखता है"या उसका"'ओहदा बड़ा नहीं है"या"ज़्यादा अच्छा नहीं है"। इख़्तियारी तर्जुमा है, "शागिर्द हमेशा ही उस्ताद से कम ख़ास होता है"या"उस्ताद हमेशा ही शागिर्द से ज़्यादा ख़ास होता है।"
"ग़ुलाम अपने मालिक पर हाकिम नहीं होता है"यह भी एक आम हक़ीक़त है,न कि किसी ग़ुलाम ख़ास या उसके मालिक से मुत'अल्लिक़ है। ग़ुलाम अपने मालिक से न तो"ज़्यादा बड़ा"होता है न ही"ज़्यादा ख़ास"होता है। इख़्तियारी तर्जुमा"ग़ुलाम हमेशा ही अपने मालिक से कम ख़ास होता है",या"मालिक हमेशा ही ग़ुलाम से ज़्यादा ख़ास होता है"।
"ग़ुलाम"
"मालिक"
"शागिर्द"को अपने उस्ताद के जैसा होने में ही सब्र करना है"।
"अपने उस्ताद की मानिन्द'आलिम"या"जैसा उस्ताद वैसा शागिर्द"होना ही काफ़ी है।
....और ग़ुलाम को अपने मालिक की मानिन्द ख़ास होना ही काफ़ी है“।
'ईसा के साथ बुरा सुलूक किया जा रहा था लिहाज़ा'ईसा के शागिर्दों को भी वैसे ही सुलूक बल्कि उससे भी बुरे की उम्मीद करना है।(देखें यू.डी.बी)
इख़्तियारी तर्जुमा"क्योंकि उन्होंने...कहा है।"
'ईसा"घर के मालिक"को अपने लिए तशबीह के तौर पर काम में ले रहा है।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)
असल ज़बान में इसका मतलब हो सकता है, (1)बालज़बूल(2)या इसका मतलब शैतान होता है।
'ईसा"घरवालों को"मिसाल के तौर पर शागिर्दों के लिए काम में ले रहा है।
'ईसा अपने शागिर्दों को उनके आने वाले सताव की गुफ़्तगू कर रहा है, इसका शुरू' MAT 10:16 में हुआ है।
"वे"ज़मीर उन इन्सानों का'इल्म कराती है जो'ईसा के शागिर्दों को सताते थे।
इस क़यास का तर्जुमा इस तरह भी किया जा सकता है, "ख़ुदा इन्सानों की छुपी बातों को ज़ाहिर कर देगा"।(देखें: : /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-parallelism, /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)
कान सुनते हो,उसे छतों पर से'एलान करो। इस क़ियास का तर्जुमा हो सकता है, "मैंने जो तारीकी में कहा उसका दिन में'ऐलान करो और जो कान में धीमी आवाज़ में सुनते हो उसका छतों पर से'ऐलान करो"।
“जो मैं तुमसे छुपा करके कहता हूँ“ या ”जो बातें मैं तुमसे अकेले में कहता हूँ”(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)।
"खुलकर कहो"या"सबको सुनाओं" (देखें यू.डी.बी.) (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)
"मैं तुम्हारे कानों में जो धीमी आवाज़ में कहता हूँ।"
"सबको ऊंचे लफ़्ज़ो में सुनाओ" 'ईसा के ज़माने में घर की छतें बराबर होती थी और अगर वहाँ से कोई कुछ कह ले सब सुन सकते थे।
'ईसा अपने शागिर्दों को उनके आने वाले सताव की गुफ़्तगू कर रहा है, इसका शुरू' MAT 10:16 में हुआ है।
"इन्सानों से मत डरना क्योंकि वे जिस्म को हलाक करते हैं रूह को नहीं"।
जिस्म को मार सकते हैं अगर ये लफ़्ज़ ग़ैर मुनासिब मा'लूम हों तो इसका तर्जुमा हो सकता है, "जो तुम्हारा क़त्ल करते हैं"या"इन्सानों का क़त्ल करते हैं"।
इन्सान का वह'अज़्व जो हुआ जा सकता है।
इन्सान के मरने के बा'द नुक़सान नहीं पहुंचा सकते।
इन्सान का वह'अज़्व जिसको छुआ नहीं जा सकता और जो मरने के बा'द ज़िन्दा रहता है।
इस सवाल का तर्जुमा हो सकता है, "गौरैयों को देखो। उनकी क़ीमत कितना कम है कि एक पैसे में दो ख़रीदी जा सकती हैं"(यू.डी.बी.)।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-rquestion)
इन छोटे दाना चुगने वाले परिन्दों को मिसाल के तौर पर उन चीज़ों लिए काम में लिया जाता है जिन्हें बेफ़ायदा समझा जाता है।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)
इसका तर्जुमा मौजूदा ज़बान में सबसे छोटे सिक्के के लिए किया जाए। यह एक ताँबे का सिक्का था जो मज़दूर की एक दिन की मज़दूरी सौलहवें हिस्से के बराबर था। इसका तर्जुमा"बहुत कम पैसों में"भी हो सकता है।
इस मुज़ाहरे का तर्जुमा इस तरह हो सकता है, "उनमें से एक भी मरेगी तो बाप को उसकी'इल्म होगा"। या"सिर्फ़ बाप की'इल्म से ही एक भी मरेगी"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-litotes)
"एक भी गौरैया"
"नहीं मर सकती"
"ख़ुदा जानता है कि तुम्हारे सिर पर कितने बाल हैं।" (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)
"शुमार की हुई है"।
ख़ुदा तुम्हें बहुत ज़्यादा गौरैयों से बढ़कर मानता है।
'ईसा अपने शागिर्दों से उनके आने वाले सताव की गुफ़्तगू कर रहा है, इसका शुरू' MAT 10:16 में हुआ है।
“जो इन्सानों के सामने ज़ाहिर करे कि वह मेरा शागिर्द है” या “जो कोई इन्सानों के सामने मेरे लिए मेरी परस्तिश को क़ुबूल करेगा”।
"क़ुबूल करेगा" (यू.डी.बी.)
"इन्सानों के सामने"या"दूसरों के सामने"
'ईसा आसमानी बाप ख़ुदा के बारे में कह रहा है।
जो कोई इन्सानों के सामने मेरा इंकार करेगा"जो कोई इन्सानों के सामने मुझे ठुकराएगा"या"जो इन्सानों के सामने तुमसे नफ़रत करेगा"या"जो इन्सान के सामने मेरा शागिर्द होना क़ुबूल नहीं करेगा"या"जो मेरे फ़िर मालिक की परस्तिश का इन्कार करेगा"।
'ईसा अपने शागिर्दों से उनके आने वाले सताव की गुफ़्तगू कर रहा है, इसका शुरू' MAT 10:16 में हुआ है।
"ऐसा नहीं सोचना"या"यह नहीं मानना"
इस मिसाल का मतलब हो सकता है, (1)तशादुद् मौत(देखें सलीब10:37/10:38)या(2)तक़सीम कारी दुःख(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)
"बदल दूँ",या"तक़सीम कर दूं"या"अलग कर दूँ"।
"बेटा को बाप के ख़िलाफ़"
इन्सान के दुश्मन या"इन्सान के सबसे बड़े दुश्मन"
"उसके ख़ानदान के अपने मेम्बर"
'ईसा अपने शागिर्दों को उनके आने वाले सताव की गुफ़्तगू कर रहा है, इसका शुरू' MAT 10:16 में हुआ है।
बाप को मुझसे ज़्यादा'अज़ीज़ जानता है वह मेरे लायक़ नहीं। इख़्तियारी तर्जुमा"जो....अज़ीज़ जानते हैं वे....लायक़ नहीं"या"अगर तुम....मुहब्बत करते हो तो....लायक़ नहीं।"
इसका तर्जुमा यह भी हो सकता है, "जो कोई"या"वह जो"या"जो इन्सान"।(देखें यू.डी.बी.)
यहाँ"अज़ीज़"का मतलब है"भाई चारे का मुहब्बत" "या" "दोस्त का मुहब्बत"इसका तर्जुमा यह भी हो सकता है, "फ़िक्र करता है"या"सुपूर्द है” या"लगाव रखता है"।
इसका तर्जुमा यह भी हो सकता है, "मेरा होने के लायक़ नहीं"या"मेरा होने के लायक़ नहीं"या"मेरा शागिर्द होने के लायक़ नहीं"या"मेरा होने का नहीं"।(देखें यू.डी.बी.)
इख़्तियारी तर्जुमा"जो अपना सलीब न उठाएं वे....लायक़ नहीं"या"अगर तुम अपना सलीब न उठाओ तो...लायक़ नहीं"या जब तक तुम अपना सलीब न उठाओ तब तक...लायक़ नहीं"।
यह मरने के लिए तैयार रहने का मिसाल है। आपको सामान उठाकर किसी के पीछे चलने का कोई आसान लफ़्ज़ काम में लेना होगा।(देखें: Metaphor)
"लेकर"या"उठाकर चलना"।
इनका तर्जुमा यथा मुमकिन कम से कम लफ़्ज़ो में करना होगा। इख़्तियारी'तर्जुमा"जो खोज में रहेंगे....खोएंगे और जो खोएंगे....पाएंगे"या"अगर तुम खोजते हो तो खोओगे....खोओगे तो....पाओगे"।
यह"रखने"या"बचाने"के लिए'आलामती इस्ते'माल है। इसका इख़्तियारी तर्जुमा है, "रखने का कोशिश करता है"या"हिफ़ाजत करने की कोशिश करता है"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metonymy)
इसका मतलब यह नहीं कि इन्सान मर जायेगा। यह"सच्चा ज़िन्दगी नहीं पाएगा"के लिए मिसाल काफ़ी है।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)
इख़्तियारी तर्जुमा हैः"छोड़ता है"या"छोड़ने के लिए तैयार हैं"।
"क्योंकि वह मुझ में ईमान रखता है" (देखें यू.डी.बी.)या"मेरे लिए",या"मेरे लिए"। यह वही ख्याल है जो MAT 10:18 में ज़ाहिर है।
इस मिसाल का मतलब है"सच्चा ज़िन्दगी पाएगा" (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)
'ईसा अब अपने शागिर्दों से कहना शुरू' करता है कि जब वे निकलेंगे तब उनकी मदद करने वालों को वह 'अज़र देगा।
इसका तर्जुमा हो सकता है, "जो कोई"या"हर एक जो"या"वह जो"।(देखें:यू.डी.बी.)
यह वही लफ़्ज़ है,जो MAT 10:14 में आया है, "क़ुबूल"जिसका मतलब है मेहमान को जैसे क़ुबूल करना।
"तुम्हें इसमें जमीर का मतलब है वे शागिर्द जिनसे'ईसा बातें कर रहा है।"
"मेरे बाप ख़ुदा को क़ुबूल करता है जिसने मुझे भेजा है"।
इसके साथ ही 'ईसा अपने रसूलों को क़ुबूल करने वालों के अज़र की गुफ़्तगू ख़त्म करता है।
"जो कोई भी पिलाए"
इन छोटों में से एक को मेरा शागिर्द जानकर एक कटोरा ठंडा पानी पिलाए। इसका तर्जुमा इस तरह भी हो सकता है, "क्योंकि वह मेरा शागिर्द है इन छोटों में से किसी एक को भी"या"मेरे शागिर्दों में छोटे से छोटे को भी ठंडा पानी पिलाए"।
"वह इन्सान ज़रुर ही अपना अज्र पाएगा"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-litotes)
"इन्कार किया जाएगा"इख़्तियार से इसका कोई रिश्ता नहीं है।