1 पिच्छु फिर बा सभाघर में गव, हुवाँ सुखो हात भव एक आदमी रहय। 2 बा बाके शबाथ-दिनमें अच्छो करेहए करके बाके दोष लगान आदमी बाको चूहा लेतरहएँ। 3 तव बा सुखो हात भव आदमी से कहि, “यिताए आ।" 4 बा उनसे कहि, बिश्रामदिनमे अच्छो करन् कि खराबी करन्, ज्यान बचान् कि नाश करन् कउन् ठीक हए?” तओ बे चुप् लागे रहे । 5 बिनको हृदय को कठोरता में दु:खी हुईके क्रोधित भव और बा उनके सबके देखी और बहे आदमी से कहि, “तेरो हात बढा।” बा हात बढाई और बाको हात अच्छो हुइगओ। 6 तओ निकरके गए बाके कईसे नाश करएँ करके फरिसी तुरन्त हेरोदसँग बाके बिरोधमे सल्लाह करीं। 7 तओ पिच्छु येशू अपन् चेलन संग समुन्द्र घेन गओ, और गलिलसे आदमिन् की बहुत भारी भीड बाके पिच्छु लागी। 8 यहूदिया, यरुशलेम, इदुमिआ, यर्दनपार और टुरोस और सिदोनक आसपासके आदमीन् को बहुत भारी भीड बाको अचम्मो काम के बारेमे सुनन् बाके ठिन आए। 9 भीड बाके चिब्दाबय नाए करके बा अपन चेलन् से अपने ताहीं एक नैयाँ तयार करन लगाई। 10 बा बहुतन्के अच्छो करी बहेमारे रोग लगे भए सब बाके छूइहएँ करके धकेला धकेल करत रहएँ। 11 जब अशुध्द आत्मा बाके देखत रहएँ, घुप्टा पड्के अईसे चिल्लात रहएँ, “तए परमेश्वरको लउँडा हय।" 12 तव बाके कोइन के पता न चलय करके बिनके बा कडो हुकम दै। 13 तओ पिच्छु येशू डँगामें चढो, और बा अपने चाहन बारे जीत्तोनके बुलाई, और बे बाके ठिन अाए। 14 अपन् सँग रहन् और प्रचार करन पठानके बा बाहृओं जनीके नियुक्त करी, 15 और उनके भुत निकारन के अधिकर फिर दै। 16 और बाहृओं प्रेरित जेहि हएँ : सिमोन, जौंनको नाउँ बा पत्रुस धरिरहए, 17 17 जब्दियाक लउँडा याकूब और याकुबको भईया युहन्ना। बा उनके बोअनर्गेश, औ गर्जनको लउँडा करके नाउँ दै। 18 अन्द्रीयास, फिलिप, बारथोलोमाई , मत्ती, थोमा, अल्फयसको लउँडा याकूब, और थेदियस, सिमोन कनानी, 19 और यहूदा इस्करियोत जौन बाके धोका दै। 20 तओ येशू फिर घर घेन फिर गओ। भीड़ जम्मा हुईगव, हियाँतक की बा खानु खान तक न पाईं। 21 जब येशूके परिवारके जा सुनी, तव बाके लैजानके बे निकरे और बाको मन ठिगानामे न हय करके बे कहत रहयँ। 22 यरुशलेमसे आए भए व्यवस्थाके शास्त्री कहीं, “ बामे बालजिबुलको भुत हए, और भुतक मालिकसे बा भुत निकारत हए।” 23 तओ बा उनके अपने ठिन बुलाए के कहानी कही, “ शैतान शैतानके कैसे निकारैगो ? 24 कुई राजको आपसमे फुट हुईहए तव बा राज टिक न पए 25 हए। 25 कुई घरको आपसमें फुट भव तव बा घर टिक न पएहए। 26 और शैतान शैतानके विरुद्दमें खड़ो हुइके फुट लीअए हए, तव बा न टीकैगो , तव बाको अन्त आएजय हए। 27 कोई फिर बली आदमी के घरमे घुसके धनमाल लूट न पएहयँ, जबतक बा बली आदमी के न बाँधहए तओ बा बाको घर लुट न पएहए। 28 नेहत्य, मै तुमसे कहत हौं, आदमीन को सब पाप और ईश्वर-निन्दा क्षमा करे जयहयँ, 29 पर पबित्र आत्माके बिरुद्दमें निन्दा करन बारेनके कबहु क्षमा न हुइहए, तओ बा अनन्त पापकर्मको दोषी ठहारैगो।" 30 येशू जा वचन कहि, काहेकी ""बा अशुद आत्मा हए करके बे कहत रहएँ। " 31 बाकी अइया और बक भैइया बाके हुवाँ आए, और बाहिरय ठाड्के बाके बुलान पठाईं। 32 भीड़ बाके आसपास बैठीरहए और बे बासे कहीं, “देख तुमर अईया और तुमर भैइया तुमके बाहिर ढुणत हएँ।” 33 बा उनके जबाफ दैके कही, मिर अईया और भैइया कौन हए ? 34 और अपने आसपास चारौंघेन देखके बा कही, “देखओ जेहि हएँ मिर अईया और भैइया। 35 काहेकी जौन परमेश्वरको इच्छा पालन करत् हएँ बेहि मिर भैइया और मिर बहिनिया और मिर अईया हएँ।”