'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
अपने आगे तुरही न बजवा तवज्जोह का मरकज़ नहीं बनना जैसे भीड़ के बीच तुरही बजाने वाला करता है।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)
वही लफ़्ज़ काम में ले जो MAT 5:16 में काम में लिए हैं।
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
यह कामिल पोशीदगी की मिसाल है। जिस तरह के हाथ एक साथ काम करते है और कहा जा सकता है कि वे हमेशा एक दूसरे के काम जानते हैं। तुम्हें अपने नजदीकी सख्श पर भी ज़ाहिर नहीं होने देना है कि तुम गरीबों को कब हदिया देते हो।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)
"तू गरीबों को हदिया दे तो कोई भी जान न पाए"।
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है,यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू'हुआ था ।
इख़्तियारी तर्जुमा"मैं तुम्हें सच बताता हूँ"।
इख़्तियारी तर्जुमा"किसी अकेला क़याम में जा"या"अन्दर कमरे में जा"
इसका तर्जुमा ऐसे किया जा सकता है, "तेरा बाप देखता है कि इन्सान बगल में क्या करते हैं।"
बेमतलब लफ़्ज़ो को दोहराना।
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
तेरी बादशाही आए देखना चाहते हैं कि तू सब इन्सानों और सब चीज़ों पर बादशाही करे।
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
जुर्म के लिए"कर्ज़"लफ़्ज़ को भी मिसाल के तौर पर काम में लिया गया है जबकि कर्ज़ का मतलब है किसी से कुछ क़र्जे लेना।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)
जो किसी का क़र्ज़दार है। गुनाहगारों के लिए मिसाल है।
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
"यह भी।"
"वैसे ही दिखाई दो जैसे'आम तौरपर दिखते थे"। तेल मलने का मतलब है'आम तौर से बाल संवारना। इसका मतलब"मसीह"या'नी"मसा किये लोगो"से कुछ नहीं है।
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
दौलत बुनयादी चीज़े है जिनसे हम ख़ुश होते हैं।
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
"चेराग़ के जैसे आँख आपको साफ़ देखने में मददगार होती है"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)
अगर आपकी आंखें सही हैं,अगर आप देख सकते है तो आपका मुकम्मल जिस्म मुनासिब तौर से काम करेगा,या'नी आप चल सकते हैं,काम कर सकते हैं वगैरह। यह एक मिसाल है जो ख़ुदा के तरह देखने के लिए काम में लिया गया है,ख़ास करके सेखावत और चाहत का रिश्ता है।(देखें यू.डी.बी.)
इसका तर्जुमा जमा'में करना होगा।
यह समझने के लिए मिसाल है।
यह जादू नहीं है। इख़्तियारी तर्जुमा"तू वैसे नहीं देख सकता जैसे ख़ुदा देखता है"। यह चाहत के लिए भी मिसाल हो सकती है। देखें यू.डी.बी., "तू कैसे लालची हो गया"और MAT 20:15).
"जिसे तू रोशनी समझता है वह हक़ीकत में तारीकि है।"यह एक मिसाल है जिसका मक़सद है कि इन्सान सोचता है कि उसका समझना ऐसा ही है जैसा ख़ुदा का समझना है जबकि वह हक़ीकत में वैसा समझता नहीं हैं।
तारीकीं में रहना बुरा है। तारीकी में रहकर सोचना कि रोशनी में हैं तो वह और भी ज़्यादा बुरा है।
ये दोनों जुमले एक ही बात कि मिसाल देते हैं,ख़ुदा और दौलत दोनों ही से मुहब्बत और ईबादत दिखाने में नाअहल होना।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-parallelism)
"तुम ख़ुदा और दौलत दोनों की ख़िदमत एक साथ नहीं कर सकते।"
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
खाना और कपड़ा ज़िन्दगी में सब से ज़्यादा अहम नहीं हैं यह बनावटी सवाल का मुक़सद है, "तुम्हारी ज़िन्दगी तुम्हारे खाने से और कपड़ो से बढ़कर है"। इख़्तियारी तर्जुमा"ज़िन्दगी खाने से बढ़कर है,नहीं है क्या?और जिस्म कपड़ो से बढ़कर है,नहीं है क्या"? (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-rquestion)
फसल रखने की जगह
इस बनावटी सवाल का मुक़सद है, "तुम आसमान के परिन्दों से ज़्यादा क़ीमती हो"। इख़्तियारी तर्जुमा: "तुम परिन्दों से ज़्यादा क़ीमती हो,नहीं हो क्या"?
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
इस सवाल का मक़सद है कि इन्सान फ़िक्र करके ज़्यादा नहीं जी सकता। देखें: (/WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-rquestion)
एक घड़ी यहाँ मिसाल के तौर पर काम में ली गई है यह ज़िन्दगी का वक़्त बढ़ाने के लिए काम में लिया गया है।(देखें: rc://ur-deva/obe/other/biblicaldistance और /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)
इस सवाल का मक़सद है, "तुम्हें फ़िक्र नहीं करना है कि क्या पहनेंगे।"
"ग़ौर करो"।
यह जंगल का एक फ़ुल है
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
अगर आपकी ज़बान में घास के लिए लफ़्ज़ है और MAT 6:28 में आने सोसन के लिए जो लफ़्ज़ काम में लिया है, उन्हें यहाँ काम में लें।
'ईसा के वक़्त यहूदी खाना बनाने के लिए घास जलाते थे। (देखें यू.डी.बी.) इख़्तियारी तर्जुमा "आग में डाली जायेगी" या "जलाई जायेगी"।
'एतमाद। 'ईसा उन्हें झिड़क रहा था क्योंकि उनको ख़ुदा पर पूरा 'एतमाद नहीं था। इख़्तियारी तर्जुमा "तुम जिनका ईमान ऐसा कम है“ या एक नया जुमला, ”तुम्हारा ईमान इतना कम क्यों है"?
इख़्तियारी तर्जुमा "इन बातों के वजह"।
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
हर लफ़्ज़ एक नये जुमले कि शुरुवात' करता है तो MAT 6:31 का ज़िक्र करता है। या'नी ग़ैरज़ाती इन सब चीजों की खोज में रहते हैं, लेकिन "फ़िक्र न करना", "तुम्हारा आसमानी बाप जानता है की तुम्हें इन सब चीजों की ज़रूरत है "लेकिन फ़िक्र न करना"।
इख़्तियारी तर्जुमा "इन बातों कि वजह"।
दिन का एक सख्श का ख़िताब हक़ीकत में उस इन्सान का शबीह है जो "कल के दिन के लिए जीता है।" (देखें यू.डी.बी.)(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-personification)
इसका तर्जुमा ऐसे भी किया जा सकता है, "आज कि दिन के लिए आज की परेशनियाँ ही बहुत हैं"।