Matthew 6

Matthew 6:1

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा भीड़ से बातें कर रहा है कि जाती तौर में उनके साथ क्या हो सकता है। "तुम", "तू", "तेरा" सब जमा' में हैं।

अपने आगे तुरही न बजवा।

अपने आगे तुरही न बजवा तवज्जोह का मरकज़ नहीं बनना जैसे भीड़ के बीच तुरही बजाने वाला करता है।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)

बड़ाई

वही लफ़्ज़ काम में ले जो MAT 5:16 में काम में लिए हैं।

Matthew 6:3

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा भीड़ से बातें कर रहा है कि उसके साथ जाती तौर पर क्या हो सकता है। "तू", "तेरा" जमा' में हैं।

जो तेरा दाहिना हाथ करता है उसे तेरा बायाँ हाथ न जानने पाए।

यह कामिल पोशीदगी की मिसाल है। जिस तरह के हाथ एक साथ काम करते है और कहा जा सकता है कि वे हमेशा एक दूसरे के काम जानते हैं। तुम्हें अपने नजदीकी सख्श पर भी ज़ाहिर नहीं होने देना है कि तुम गरीबों को कब हदिया देते हो।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)

तेरा हदिया छुपा रहे।

"तू गरीबों को हदिया दे तो कोई भी जान न पाए"।

Matthew 6:5

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है,यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू'हुआ था ।

'ईसा भीड़ से बातें कर रहा है कि उनके साथ जाती तौर पर क्या हो सकता है। आयत 5 और 7 में "तू" "तुम" जमा' में हैं। आयत 6 में वे वाहिद में है लेकिन आपको उनका तर्जुमा जमा' में करने की ज़रूरत पड़ सकती है।

मैं तुमसे सच कहता हूँ।

इख़्तियारी तर्जुमा"मैं तुम्हें सच बताता हूँ"।

अपनी कमरे में जा।

इख़्तियारी तर्जुमा"किसी अकेला क़याम में जा"या"अन्दर कमरे में जा"

तेरा बाप जो बगल में देखता है।

इसका तर्जुमा ऐसे किया जा सकता है, "तेरा बाप देखता है कि इन्सान बगल में क्या करते हैं।"

बक बक न करो।

बेमतलब लफ़्ज़ो को दोहराना।

बहुत बोलने से।"लम्बी दुआएं"या"बहुत लफ़्ज़"

Matthew 6:8

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा भीड़ से बातें कर रहा है कि उनके साथ जाती तौर पर क्या हो सकता है। वह उनके साथ इजतमाई' बातचीत कर रहा है, जहाँ तक "इस तरह से दु'आ करने की वजह है, "बाप" के साथ जुड़े "तुम्हारा" लफ़्ज़ सब वाहिद है।

तेरा नाम पाक माना जाए।"हम चाहते हैं कि सबको मा'लूम हो कि तू पाक है"।

तेरा बादशाही आए।

तेरी बादशाही आए देखना चाहते हैं कि तू सब इन्सानों और सब चीज़ों पर बादशाही करे।

Matthew 6:11

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

"हम", "हमारे" के सब इस्ति'माल उस भीड़ से मुंसलिक हैं जिनसे 'ईसा बातें कर रहा है। (देखें: : /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-exclusive)

मुजरिम

जुर्म के लिए"कर्ज़"लफ़्ज़ को भी मिसाल के तौर पर काम में लिया गया है जबकि कर्ज़ का मतलब है किसी से कुछ क़र्जे लेना।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)

मुजरिमों।

जो किसी का क़र्ज़दार है। गुनाहगारों के लिए मिसाल है।

Matthew 6:14

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा भीड़ से बातें कर रहा है कि जाती तौर पर उनके साथ क्या हो सकता है। "तू" और "तेरा" के सब बारे में जमा' में हैं।

Matthew 6:16

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा भीड़ से बातें कर रहा है कि जाती तौर पर उनके साथ क्या हो सकता है। आयत 17 और 18में "तू", "तेरा" तुझ के सब के बारे में वाहिद है। आप मुमकिन तौर पर इनका तर्जुमा जमा' में करना चाहेंगे कि आयत 16 में "तुम" से तरतीबवार हो।

इसके ज़्यादा।

"यह भी।"

सिर पर तेल मल।

"वैसे ही दिखाई दो जैसे'आम तौरपर दिखते थे"। तेल मलने का मतलब है'आम तौर से बाल संवारना। इसका मतलब"मसीह"या'नी"मसा किये लोगो"से कुछ नहीं है।

Matthew 6:19

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा भीड़ से बातें कर रहा है कि जाती तौर से उनके साथ क्या हो सकता है।"तेरा" वाहिद है।

दौलत जमा'करो।

दौलत बुनयादी चीज़े है जिनसे हम ख़ुश होते हैं।

Matthew 6:22

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा भीड़ से बातें कर रहा है कि जाती तौर से उनके साथ क्या हो सकता है। "तेरी", "तेरा" वाहिद में है लेकिन आपको इनका तर्जुमा जमा' में करने की ज़रूरत हो सकती है।

जिस्म का चेराग़ आँख है।

"चेराग़ के जैसे आँख आपको साफ़ देखने में मददगार होती है"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)

अगर तेरी आँख साफ़ हो तो सारा जिस्म भी रौशन होगा।

अगर आपकी आंखें सही हैं,अगर आप देख सकते है तो आपका मुकम्मल जिस्म मुनासिब तौर से काम करेगा,या'नी आप चल सकते हैं,काम कर सकते हैं वगैरह। यह एक मिसाल है जो ख़ुदा के तरह देखने के लिए काम में लिया गया है,ख़ास करके सेखावत और चाहत का रिश्ता है।(देखें यू.डी.बी.)

आँख

इसका तर्जुमा जमा'में करना होगा।

रोशनी से भर जाओं।

यह समझने के लिए मिसाल है।

अगर तेरी आँख बुरी है।

यह जादू नहीं है। इख़्तियारी तर्जुमा"तू वैसे नहीं देख सकता जैसे ख़ुदा देखता है"। यह चाहत के लिए भी मिसाल हो सकती है। देखें यू.डी.बी., "तू कैसे लालची हो गया"और MAT 20:15).

जो रोशनी तुममें है वह हक़ीक़त में तारीकी है।

"जिसे तू रोशनी समझता है वह हक़ीकत में तारीकि है।"यह एक मिसाल है जिसका मक़सद है कि इन्सान सोचता है कि उसका समझना ऐसा ही है जैसा ख़ुदा का समझना है जबकि वह हक़ीकत में वैसा समझता नहीं हैं।

वह तारीकी कैसे बड़ा होगा?

तारीकीं में रहना बुरा है। तारीकी में रहकर सोचना कि रोशनी में हैं तो वह और भी ज़्यादा बुरा है।

वह एक से अदावत और दूसरे से मुहब्बत रखेगा या एक के बदले मालिक कि फ़रमाबरदारी करेगा और दूसरे को छोट जानेगा।

ये दोनों जुमले एक ही बात कि मिसाल देते हैं,ख़ुदा और दौलत दोनों ही से मुहब्बत और ईबादत दिखाने में नाअहल होना।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-parallelism)

तुम ख़ुदा और दौलत दोनों की ख़िदमत नहीं कर सकते।

"तुम ख़ुदा और दौलत दोनों की ख़िदमत एक साथ नहीं कर सकते।"

Matthew 6:25

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा भीड़ से बातें कर रहा है कि जाती तौर पर उनके साथ क्या हो सकता है। "तुम" जमा' में है।

क्या जान खाना से और जिस्म कपड़ा से बढ़कर नहीं?

खाना और कपड़ा ज़िन्दगी में सब से ज़्यादा अहम नहीं हैं यह बनावटी सवाल का मुक़सद है, "तुम्हारी ज़िन्दगी तुम्हारे खाने से और कपड़ो से बढ़कर है"। इख़्तियारी तर्जुमा"ज़िन्दगी खाने से बढ़कर है,नहीं है क्या?और जिस्म कपड़ो से बढ़कर है,नहीं है क्या"? (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-rquestion)

खत्तों

फसल रखने की जगह

क्या तुम उनसे ज़्यादा क़ीमत नहीं रखते?

इस बनावटी सवाल का मुक़सद है, "तुम आसमान के परिन्दों से ज़्यादा क़ीमती हो"। इख़्तियारी तर्जुमा: "तुम परिन्दों से ज़्यादा क़ीमती हो,नहीं हो क्या"?

Matthew 6:27

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा भीड़ से बातें कर रहा है कि जाती तौर पर उनके साथ क्या हो सकता है। "तुम" जमा' में है।

तुममें कौन है जो फ़िक्र करके अपनी उम्र में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है?

इस सवाल का मक़सद है कि इन्सान फ़िक्र करके ज़्यादा नहीं जी सकता। देखें: (/WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-rquestion)

एक घड़ी

एक घड़ी यहाँ मिसाल के तौर पर काम में ली गई है यह ज़िन्दगी का वक़्त बढ़ाने के लिए काम में लिया गया है।(देखें: rc://ur-deva/obe/other/biblicaldistance और /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)

और कपड़ा के लिए क्यों फ़िक्र करते हो?

इस सवाल का मक़सद है, "तुम्हें फ़िक्र नहीं करना है कि क्या पहनेंगे।"

तवज्ह दो।

"ग़ौर करो"।

सोसनों

यह जंगल का एक फ़ुल है

Matthew 6:30

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा भीड़ से बातें कर रहा है कि जाती तौर पर उनके साथ क्या हो सकता है। "तुम" जमा' में है।

घास

अगर आपकी ज़बान में घास के लिए लफ़्ज़ है और MAT 6:28 में आने सोसन के लिए जो लफ़्ज़ काम में लिया है, उन्हें यहाँ काम में लें।

आग में झोंकी जायेगी।

'ईसा के वक़्त यहूदी खाना बनाने के लिए घास जलाते थे। (देखें यू.डी.बी.) इख़्तियारी तर्जुमा "आग में डाली जायेगी" या "जलाई जायेगी"।

हे कम

'एतमाद। 'ईसा उन्हें झिड़क रहा था क्योंकि उनको ख़ुदा पर पूरा 'एतमाद नहीं था। इख़्तियारी तर्जुमा "तुम जिनका ईमान ऐसा कम है“ या एक नया जुमला, ”तुम्हारा ईमान इतना कम क्यों है"?

इसलिए

इख़्तियारी तर्जुमा "इन बातों के वजह"।

Matthew 6:32

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा भीड़ से बातें कर रहा है कि ज़ाती तौर पर उनके साथ क्या हो सकता है। "तुम" जमा' में है।

क्योंकि.... इसलिए

हर लफ़्ज़ एक नये जुमले कि शुरुवात' करता है तो MAT 6:31 का ज़िक्र करता है। या'नी ग़ैरज़ाती इन सब चीजों की खोज में रहते हैं, लेकिन "फ़िक्र न करना", "तुम्हारा आसमानी बाप जानता है की तुम्हें इन सब चीजों की ज़रूरत है "लेकिन फ़िक्र न करना"।

इसलिए

इख़्तियारी तर्जुमा "इन बातों कि वजह"।

"कल का दिन अपनी फ़िक्र आप कर लेगा।"

दिन का एक सख्श का ख़िताब हक़ीकत में उस इन्सान का शबीह है जो "कल के दिन के लिए जीता है।" (देखें यू.डी.बी.)(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-personification)

आज के लिए आज ही का दुःख बहुत है।

इसका तर्जुमा ऐसे भी किया जा सकता है, "आज कि दिन के लिए आज की परेशनियाँ ही बहुत हैं"।