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1-2 परमेशवर के कुछ भक्त गण ने इस्तुफुनिस के मिटटी हुई शारीर को कब्र म रख दिहिन अउ र वक् रे लिए जोर जोर में रोने लगे| उसी दिन से येरुशलम के विशवासियो पर बहुत अत्याचार होए लगा| यही लिए बहुत से विशवासी सम्पूर्ण येहुदिया अउर सामरिया के देश में फैल गए| येरोशलम जवन लोग रहत रहे वे केवल प्रेरित ही रहे | 3 जवने समय वे इस्तिफुनुस का मारत रहे वाही समय शाउल वहीं स्थान पर रहा जहा इस्थिफुनुस को मार डाला|यही से शाउल ने भी विशवा सियो के झुण्ड को समाप्त करना शुरु कर दिए | उ एक एक के घरो में घुस कर यीशु में विशवास करे वालेन स्त्री पुरुष को घर से निकाल कर बंदी घर में बंद कर देत रहा|

4 येरोशलम से भागनेवाले विशवासी अलगअलग जगहो पर चले गऐ|अउर वहीं यीशु का समाचार बताना चलता रहा| 5 उन विशवासियो में से एक, फिलिपुस येरोशलेम से निकल के सामरिया राज्य के एक शेहर में चला गवा|वहि उ मनई को समझावत रहा कि यीशु हि मसीहा है|

6 अ उ र बहुत मनई फिलिपुस बाते सुनत रहे| अउर वाकरे किये गए चमत्कारो को देखेत रहे| फिर उकै बात धियान से सुनत रहे| 7 अनुसार फिलिपुस ने बहुतो में से बुरी आत्मा निकाली अउर वै शोर मचाती हुई बाहर निकल गई| 8 अउर लाकुवे के बिमारो अ उर लंगडो को ठीक किया|अउर शहरवासियों ने खुशिया बाटी |

9 उस शहर में शमौन कहलाने एक मनई रहा| अउर बहुत पहेले से जादू करत रहा, जिक्रे द्रारा गावन के लोगो का भर्मित करत रहा कि वह बहुत बड़ा शिमोन हे| 10 वहिके सब मनई चाहे छोटा हो या बड़ा वकै बात मानत रहे|वे कहत रहे उ मनई मा परमेशवर कि महाशक्ति हे| 11 वै उसकी बात मानत रहे, काहे से बहुत समय से ऊ जादू के बल पर भर्मित करत रहा|

12 लकिन जब ऊ परमेंशवर के राज्य के विषय मा अ उर यीशु मसीह के विषय म अच्छा समाचार कै संदेश फिलिपुस से जानिस तौ विशवाश करै लाग| अउर विशवाश करने वाले स्त्री -पुरुष ने बप्त्तिस्मा लिहीन| 13 शिमोन ने भी फिलिपुस का समाचार सुनिस अउर बत्तिस्मा लहिस| ऊ फिलिपुस के बीच मा रहय लगा| उ फिलिपुस कै आशचर्य भरा बड़ा बड़ा काम देख कै चकित होइगा अउर विशवाश कर लिहिस कि फिलिपुस सही कहत बाय|

14 जब प्रेरितो ने सुना कि सामरिया गॉव मा बहुत लोग परमेशवर कै संदेश पाई के विशवाश कर लिहीन तौ ऊहा पतरस अउर यहुन्ना का भेज देहिन| 15 वहि जाय के पतरस अउर यहुन्ना न नये विशवासीयंन के लिए विनती किहिनकि उन्हें पवित्र आत्मा मिले| 16 काहे से सब जानत रहे कि पवित्र आत्मा केहू का अबहीं नाही मिला बाय| सिर्फ मसीह के नाम पे बत्तिस्मा लिहे है| 17 पतरस अउर यहुन्ना आपन हाथ जैसे उनके ऊपर रखे उसी समय पवित्र आत्मा उनके भीतर आगया|

18 शामोन देखिस कि प्रेरितों के हाथ रखतय ही वे सब पवित्र आत्मा पाय गए ऊ प्रेरितों को पैसा दिए के लिए कहय लगा| 19 उउर कहिस हम हूँ का अपने जैसन शक्ति वाला बनाय दिये जवने से जिस परहम हाथ रखे उसे पवित्र आत्मा मिल जाये|

20 किन्तु पतरस उनसे कहिस कि तू अउर तुहार पैसा खत्म होई जाये, काहे से कि तू परमेंशवर के शक्ति पैसा से ख़रीदे चाहत हया| 21 तू यहि काम मा भागीदार नाही होई पईबा काहे से कि तोहार मन परमेंशवर की ओर से गलत बाय| 22 ऐसे गलत कामो को छोड़ दे और परमें शवर से विनती कर कि यदि उसकी मर्जी हुई तो तेरे मन के गलत कामो के लिए माफ़ कर दे| 23 अपने गलत कामो को छोड़ दे क्योकि मै तोहेरेकामो को जान गया हु कि तू हम से बहुत घिरणा रखते हो और हेमेशा बुरा ही सोचते हो|

24 शिमोन ने उनसे विनती किहिस कि परमेशवर से प्रार्थना कर कि वह हमरे साथ ऐसा न करे जैसा तुमने अभी कहा है|

25 वह मनई का जोन प्रभु के विषय में जानत रहे उन्हें प्रभु कै संदेश बताय के बाद पतरस और यहुन्ना येरुशेलम लौट आए | रास्ता मा वे सम्रिवासियो को यीशु के विषय में सुभ समाचार सुनाया|

26 एक दिन परमेंशवर ने फिलिपुस के लगे आपन स्वर्गदूत भेजिन और फिलिपुस को आदेश दिहिन कि तू दक्किन कि ओर येरुशलम से गजा रास्ते पर चला जा ये रास्ता रेगिस्तान में हें| 27 फिलिपुस तैयार होकर उस रास्ते पर पंहुच गया| वहा उसकी मुलाकात एक मनई से हुई जो इथोपिया का रहेने वाला था| वह एक महान आदमी था| इथोपिया कि रानी के पुरे राज्य के खजाने का देख रेख करने वाला था|उसकी बोली में रानी को कंदाके कहते थे| ऊ मनई परमेंशवर की आराधना के लिए येरोशेलम गया था| 28 इस समय अपने गाड़ी में बैठ कर घरे जात रहा| उ यशयाह की किताब में से ऊंची आवाज में पढते हुए जा रहा था|

29 परमेंशवर कि आत्मा फिलिपुस से कहिन, ऊ गाड़ी के संघ चल| 30 तब फिलिपुस भाग के गाड़ी के पास चला गा और सुनिस कि ऊ यशयाह कि किताब प ढत बाय|उसने इथिओपिओवासिओ से कहे से कहिस तू जोन पढत हया का ऊका समजतो हेया| 31 ऊ फिलिपुस से कहिस नाहो यदि हेमे कोई न बतावे तो समझब आसान ना बाय| ऊ फिलिपुस से कहिस तू हेमरे लगे चला आवा|

32 यशयाह कि किताब कै जवन भाग ऊ पढत रहा| ऊ एसन रहा जैसन वध की जाने वाली भेड़|जैसन उन काटने के समय भेड़ शांत रहती है वैसे ही उ भी कछु नही बोलिस| 33 ऊ अनादर कीन जाय और इन्साफ न मिले| उनके पूर्वजो कै सवाल ही नही उठत कि वे बचि है , बल्कि वे मार डाला जैहैं|

34 ऊ इथियोपिवासी ने फिलिपुस से वहि वचन के विषय में मा मालूम किहिस कि जोंन तू प ढत हेया ऊ उसमे कौन से भविषवक्ता के विषय में लिखा है मुझे बता|क्या वह मेंरे लिए या किसी और के लिए लिखा है| 35 अतःफिलिपुस ने धर्मशास्त्र के भाग से बताना शुरु किया और यीशु का सुसमाचार उसे सुनाया|

36 ३६. जाते जाते रास्ते में वे ऐसे स्थान पर पहुचे जहां थोडा पानी था| ऊ इथिपियावासी ने फिलिपुस से कहिन देख यहाँ पानी है| मैरी इछा है कि तू मुझे बत्तिस्मा दे क्योंकि क्योंकि म 37 हम ऐसा कुछ नहीं जनित जउ ने से हमय बपतिस्मा लिए से रोके" फिर उस इथयोपियावासी ने रथ के चालक से रूकने को कहिस । 38 फिलिप्पुस और वह इथयोपियावासी पानी मा गए और फिलिप्पुस ने उसे बपतिस्मा दिहिस

39 जब वे पानी से बहिरे निकले तब परमेश्वर के आत्मा ने फिलिप्पुस को अचानक वही से उठय लिहिस । उस इथयोपियावासी ने फिलिप्पुस को फिर नहीं देखा। और उसने 40 फिलिप्पुस को नहीं देखा, वह सहर्ष अपने मार्ग में बढ़ गया। फिलिप्पुस को तब बोध हुआ कि पवित्र आत्मा ने उसे चमत्कारी रूप से अशदोद ले गया है। वह अशदोद और कैसरिया प्रदेश के क्षेत्रों में यीशु का सन्देश सुनाता रहा जब तक कि वह अन्त में कैसरिया नाहीं पहुचे