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जब हम तट पय पहुच गयन तओ हमय समझ आवा कि वह द्वीप माल्टा
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हे हुआ के रह्य वाले जादा अधिक उदारता दिखाई। उन्होंने आग जलाकर हमें उसके पास बुलाया क्योंकि पानी बरसने के कारण ठंड बहुत हय
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पौलुस ने आग मा डालय के लिए लकड़ियां एक्कटा आग की गरमी के कारण उनमें छिपा एक विषैला सांप निकल कर
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पौलुस के हाथ में लिपट गया और उसे काट लिया। पौलुस कय हाथ मा लिपटे हुए उस सांप का देख कय हुआ कय लोग आपस में कहने लागे इ शायद किसी की हत्या की है। वह समुद्र में डूबकर मरने से तो बच गया परन्तु न्यायी परमेश्वर उसे मृत्युदण्ड देता है।
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परन्तु पौलुस ने उस सांप को आग में झटक दिया। उसे कुछ हानि नहीं
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हुई। हुआ कय लोग सोचत रहे कि पौलुस का शरीर सूज जाएगा या वह गिरकर मर जायेगा। परन्तु बहुत समय बाद भी जब पौलुस को कुछ नहीं हुआ तो उन्होंने अपना विचार बदलकर आपस में कहा यह हत्यारा नहीं देवता है
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उनके निकट कुछ खेलत रहे| उन खेतों के स्वामी का नाम पुबलियुस रहा उ वह द्वीप का प्रधान रहा उसने हमें अपने घर में ठहरने का निमंत्रण दिया। उसने तीन दिन तक हमारी अच्छी सेवा टहल |
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उसका पिता ज्वर और पेचिश से ग्रस्त था अतः बिस्तर मा लेटा पौलुस ने उसके लिए प्रार्थना करके उसके सिर पर हाथ रखा और वह रोगमुक्त हो गया।
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यह देख कर उस द्वीप के सब रोगी पौलुस के पास आये और रोगमुक्त हुए। .
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वे हमारे लिए उपहार लाए और तरह-तरह से हमारा सम्मान प्रकट किया। तीन महीने बाद जब हम प्रस्थान के लिए तैयार हुए तब उन्होंने हमारी आवश्यकताओं की वस्तुयें जहाज पर चढ़ा दीं।
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आउर हुआ तीन महीने रूकय के बाद हम ने सिकंदरिया से इटली जाने वाले जहाज से प्रस्थान किया। उस जहाज के अग्र भाग में कास्तोर और पोलक्स दो देवताओं की मूर्तियां लगी हुई थीं।
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सुरकूसा नगर पहुच कय हम हुआ तीन दिन विश्राम किहन
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हुआ से चलकय हम इटली के रिगयुम नगर आए। अगले दिन हवा दक्षिण की ओर से बह रही थी, तब हम दुय दिन मा पुतियुली पहुंचे। वहां हम जहाज से उतर गये।
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पुतियुली में हमारा भेंट कुछ विश्वासियों से हुई। वे चाहते थे कि हम उनके साथ सात दिन तक रहें। उसके बाद हम अन्त में रोम पहुंचे।
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रोम में विश्वासियों ने हमारे बारे में सुना तो हमसे भेंट करने आए। कुछ की भेंट हमसे अप्पियुस मंडी मार्ग में तथा कुछ की भेंट हमसे तीन सराय नगरों में हुई। उन विश्वासियों से भेंट करके पौलुस ने परमेश्वर को धन्यवाद दिया आउर साहस बांधा
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जब हम रोम पहुंचेन तब पौलुस को अकेय एक घर में रहने की अनुमति मिल गवा लकिन उनकय निगरानी के तय एक सैनिक नियुक्त किया गया।
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वहां तीन दिन रहय के बाद पौलुस ने यहूदियों के प्रधानों का सन्देश भेजकर बुलवाया कि उसके साथ बात करय । जब वे आये तो पौलुस ने उनसे कहा हमरे प्रिय भाइयों, यद्यपि मैंने अपने लोगों का विरोध नहीं किया और न ही हमारे पूर्वजों की परम्परा के विरुद्ध कुछ कहा, परन्तु यरूशलेम के प्रधानों ने मुझे घेर लिया। इससे पूर्व कि वे मेरी हत्या करते वहां
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के रोमी सेना कमांडर ने मुझे बचाय लिहिस आउर कैसरिया भेज दिहिस कि रोम कय अधिकारी हमार न्याय करे। रोमी अधिकारियों ने मुझसे पूछताछ की और मुझे छोड़ देना चाहते थे क्योंकि मैंने कोई न्याय विरोधी काम नहीं किया था कि मुझे मृत्यु-दण्ड दिया जाय|
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लकिन जब यहूदी प्रधानों . छोड़ने की रोमियों के इच्छा के विरुद्ध छोड़य क्य आवाज उठाईन तव हम बिचार किहन कि रोमी सम्राट यहां रोम मा हमार न्याय करे लकिन यसे हमार अभिप्राय हमार प्रधानं काउनव तरहा कय दोष नहीं देखेन आउर हम आप लोगों को बुलवाया कि मैं बन्दी क्यों बनाया गया हूं।
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यह इसलिए है कि मैं वही मानता हूं जिसकी इस्राएली पूर्ण विश्वास से प्रतीक्षा करते हैं कि परमेश्वर करेगा |
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यह पर यहुदि प्र्दान बोले तोहरे रिश्तेदर आपने यहुदि पप्रधान का पत्र नाही भेजे|आउर न तो यहुदि आवे आवे वाले साथी मा एक ने कोई बुरी बात बोली
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|लकिन सुना चाहत रहे कि सब जगह मनई वाय बातचीत करत रहे उसने कहा के पोलूस यह बात चितकरे
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आउर उ कहा कि वे किसी आउर दिन आकर इस विषय में पौलुस से सुनेंगे। जब वह दिन आया तब और भी लोग उनके साथ पौलुस के पास आये। पौलुस ने उन्हें बताया कि परमेश्वर किस प्रकार सब पर राज करेगा। उसने यह भी बताया कि मूसा और भविष्यवक्ताओं ने यीशु के बारे में भविष्यवाणी की थी। पौलुस ने
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उन सब से जिन्हें रूचि थी सुबह से शाम तक बातें की। उन यहूदियों में से कुछ यीशु के बारे में पौलुस की बातों को सच मानने लगे। परन्तु अन्य उसे सच नहीं मान रहे थे।
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जब सबही आमने सामने असहमत होकर कूच करने वाले थे तव पौलुस बोला "पवित्र आत्मा ने हमारे मई बाप से सच कहत रहा
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| जब सबही भविष्यवक्ता यशायाह से इ शब्द कहत , अपने लोगों में जाकर कह, तुम कानों से सुनते हो परन्तु परमेश्वर जो कहता है उसे समझते नहीं। तुम आंखों से देखते तो हो, परन्तु परमेश्वर उनका दिहिस
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ई सबही समझिन नहीं कहेसे उ हठीले हेई गये, उनके कान बहरे हो गए हैं और उन्होंने आंखें बन्द कर ली हैं क्योंकि वे देखना नहीं चाहते हैं। वे अपने कानों से सुनना नहीं चाहते या मन से समझना नहीं चाहते क्योंकि ऐसा करके वे मेरे पास आ जायेंगे आउर हम उनकय कल्याण करय
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आउर तू समझ ललिओ कि परमेश्वर गैर यहूदियों का उध्दार रय का विचार करत है आउर उ सुनें,
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पौलुस हुआ अपने किराये के घर मा पूरे दो साल तक रहा । उससे भेंट करने अनेक जन आये। उसने सबका सहर्ष स्वागत किया और
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31 उन्हें सिखाया कि परमेश्वर किस प्रकार स्वयं को राजा प्रकट करेगा आउर उनके के बारे मा शिक्षा दे । उसने साहस के साथ यह काम किया और उसे रोकने वाला वहां कोई नहीं रहा