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पौलुस ने पंचायत के लोगन को देखत हुए कहिन "मेरे साथी यहूदियों, अपन पुरा जीवन में मैं अपने परमात्मा को सम्मान देकर जीत हैन , और हम कोई अईस गलत काम नहि कीन है
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" जब हनन्याह,मुख्य पंडित क सुना कि पौलुस का कहत है तो उसने पौलुस के पास खड़े सेवकों से कहा कि वहिके मुंह पर थप्पड़ मारे।
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पौलुस ने हनन्याह से कहिन , "परमात्मा तुझे इस काम को सजा देगा, हे पाखंडी! तू वहाँ बैठकरि मेरा न्याय करत है और वह भी मूसा के कानून के अनुसार परन्तु तू स्वयं कानून नहि मानत है क्योंकि तूने मुझे बिना गलत काम केथप्पड़ मरने का आदेश दीन हैव|
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पौलुस के पास खड़े हुए मनई ने उससे कहा, "तू हमार मुख्य पंडित प्रधान विरुद्ध तोहिका ऐस बात नहि बोलयक हति
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पौलुस न जवाब दिह्नेस "हमरे यहूदी साथियों, मुझे दुःख हैव कि हम एइश कहा हता ।"हम नहि जानत हातें कि मुझे थप्पड़ मारने के लिए तुम्हें आज्ञा देने वाला प्रधान पुरोहित है। यदिहम जानत होइत तो हम मुख्य पंडित के बारे माँ ऐसी बात नहीं बोलत क्योंकि हम जनित हन कि हमारे यहूदी कानून म लिखा है कि अपने राजा के बारे गलत नहि कहक हता
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" पौलुस जनत हता कि परिषद् के लोगो म फरीसी और सदूकी दोनों हते । अतः सभा म उ कहिस "मेरे यहूदी साथियों मैं फरीसी हूँ जैसा मेरा बाप हता । हमें यहाँ बीच म खड़ा किया गया है क्योंकि हमार मानक हता कि परमात्मा एक दिन मरे वालेन जिन्दा करियहै ।"
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उसकी यह बात सुनकर फरीसियों और सदूकियों म मरे वालेन के जी उठे पर बहस होई लाग ।
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सदूकियों का माने क हता कि मरे के बाद मनुष्य जीवित नाइ होए । वे स्वर्गदूतों और आत्माओं म भी विश्वास नहि करत हते परन्तु फरीसी इन बातन म विश्वास करत हते ।
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उनम मतभेद पैदा हो गया और वे एक-दूसरे पर चिल्ला-चिल्लाकर लडाई करने लगे। कुछजानकर लोग जो फरीसी थे उनमें से एकु ने खड़े होकर कहा, "हमारे विचार म इ मनई ने कुछ ख़राब नहीं किया है। हो सकता है कि किसी स्वर्गदूत या आत्मा ने अहिते बात किन है और जो यह कहता है, व सही
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है।" इ पर फरीसी और सदूकी एक-दूसरे पर गुस्सा दिखाव लागे । कसेनापति गवा की वी लोग पौलुस पर वर करि है। अतः उलड़कें का आदेश दिह्नें कि वे जाकर पौलुस उनके बीच से निकाल कर ऊपर जेल के कमरे म ले आएं।
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वही रात पौलुस ने देखा कि प्रभु यीशु आकर वहिके पास खड़ा है। प्रभु ने उनते कहिस , "साहस रख! तू ने यरूशलेम के निवासियों को हमरे बारे म बतावा है , अब तुई रोम म भी हमरे बारे म बताना है।
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अगलहे दिन पौलुस से घृणा करने वाले कुछ यहूदियों ने उसे मार डालने की योजना बनाई । उन्होंने प्रण किह्नें कि जब तक पौलुस कहिया मार न डारिवे न कुछ खाइबे और न पिबे । उन्होंने परमात्मा से कसम खाईन कि यदि वे ऐसा न करिहे तो परमात्मा उन्हें श्रापित ठहराए।
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वी जो पौलुस को मरि डालेक चाहत हते चालीस से अधिक थे।
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वे मुख्य पंडित और यहूदियों के धर्म-गुरुओं के पास गए और उनते कहिन ,परमात्मा ने सुना है की हम कसम खाएँ है कि जब तक हम पौलुस की हत्या न कर दें तब तक न तो कुछ खाएंगे और न कुछ पिएंगे।
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अतः हम आपसे विनती करते हैं कि आप सेनापति के पास जाकर यहूदी पंचायत की ओर से विनती करो पौलुस को हमारे सामने ले आएं। सेनापति से कहिए कि आप पौलुस से कुछ और पूछताछ करना चाहते हैं। हम रास्ता म घात लगाये रहिये |
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किन्तु पौलुस की बहन केलड़के ने सगरी बाते सुन लिन हतेस वह अपने गावं जाके पेलुस को सगरी बातें बता दिह्नें |
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उनकी बाते सुनकर पौलुस ने एक अधिकारियों में को बुलाकर कहा, "इ मनई को सेनापति के पास ले जाव क्योंकिअहिते कुछ काहक है।
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अतः वह अधिकारी उ मनई को लेकर सेनापति के पास पहुंचा और उ कहिस , हमारे बन्दी पौलुस ने हमका बुलाकर कहा , "कृप्या करके इ मनई को सेनापति के पास ले जाएं क्योंकि यह उनसे कुछ कहना चाहता
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है।" सेनापति ने उस युवक का हाथ पकड़ा और उसे अकेले में ले जाकर पूछा, "तू हमका क कहा सकत हई ,
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उ कहिन , "कुछ यहूदी पौलुस को कल यहूदी पंचायत के सामने लाना चाहत हैं। वे आपसे कहेंगे कि उन्हें पौलुस से कुछ पूछताछ करना है परन्तु यह सही नहि
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है। यदि वे आपसे ऐसा कहें तो उनकी बात पर विश्वास नहि करेक है क्योंकि चालीस से अधिक यहूदीराश्ता म घात लगाकर बैठियें कि जब पौलुस को वहाँ ले जाया जाए तो वहीपर धावा बोलके वहिका मर डालव् । उन्होंने परमात्मा के सामने कसम खाईन कि जब तक वे पौलुस को मरि डालव वो न तो कुछ खाएबे और न ही कुछ पिएंगबे । वे प्रतीक्षा में हैं और अपेक्षा करते हैं कि आप उनकी बात मान लेंगे। ,
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22 सेनापति ने उ मनई से कहा, "किसी से न बताना कि तूने मुझे उनकी बात बता दी है।" उसने उस मनई को भेज दिया
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। 23 सेनापति ने अपने दुई अधिकारिन को बुलाकर कहा, "दुई सौ सैनिकों को यात्रा के लिए तैयार करो। सत्तर घुड़सवार और दुई सौ सैनिक भाले लेकर तुम सबको आज रात के नौ बजे कैसरिया के लिए जाने के लिये तैयार रहना है।
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24 पौलुस के लिए भी घोड़ों का ब्यवस्था करो और उसे राजा फेलिक्स के घर पहुंचा दे।
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25 सेनापति ने फेलिक्स को चिटठी म लिखा,
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26 "मैं क्लॉडियस लिसिअस तुमका चिटठी लिखित हन । आप हमरे माननीय प्रशासक फेलिक्स है हम तुमका सम्मान करीत हन ।
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27 हमने आपके पास इस मनई , पौलुस को भेजा हन क्योंकि कुछ यहूदियों ने इसे मारने के लिए घेर लिन हातें । कोई ने हमसे कहनि कि यह एक रोमी मनई है इसलिए मैंने अपने लडाको के साथ इसे बचा लिया है
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हम जाना चहित हातें कि उन यहूदियों के अनुसार कहिकी गलती का है तो हम यहिका लेईके उनकी पंचायत में गेन
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और उनके प्रश्न और इसके उत्तर सुने। इ पर लगाए गए उनके दोष उनके रितरिवाज से संबंधित हैं परन्तु पौलुस ने रोम के काकुनन का नहि तोडा है। अतः हमारे अधिकारी न तो इसे मृत्युदण्ड दे पाये और न ही एहिका जेल में रख पाए।
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मुझे कहिके के द्वारा यह खबर मिली है कि यहूदी यहिका जान से मरना चाहते हैं इसलिए हमने यहिका तुमरे पास भेजे हता कि आप इसका निष्पक्ष न्याय करें। मैंने यहूदियों को भी कह दिया है कि कैसरिया जाकर आपके सामने यहिका दोष साबित करें। प्रणाम
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अतः लड़ाको ने सेनापति की आज्ञा के अनुसार पौलुस को रातों रात अन्तिपत्रिस पहुंचा दियेन ।
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32 दुस्हरे दीन लड़ाके पैदल तो हुअं से यरूशलेम लौट आए परन्तु घुड़सवार पौलुस को लेकर कैसरिया की ओर चले गए।
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33 कैसरिया पहुंचकर उन्होंने फेलिक्स को वह चिटठी और पौलुस को वहिके सामने खड़ा किह्नें
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चिटठी पढ़कर फेलिक्स ने पौलुस से पूछे की ,तू किस क्षेत्र का है?" पौलुस ने जवाब दिया, "मैं किलकिया से
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हूं।" फेलिक्स ने जवाब दिया, "जब तुम पर दोष लगाने वाले आ जायेंगे तब मैं दोनों दलों की बाते सुनकर फैसला लेबे ।" उसने आदेश दिया कि पौलुस को हेरोदेस महान द्वारा बनाया गया क्षेत्र को सुरक्षित रखा जाये।