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अम्फिपुलिस आउर अपुल्लोनिया कय भ्रमण करते हुए वे थिस्सलुनीके पहुच गये। ह यहूदियों के आराधनालय रहा ।
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जैसा पौलुस कय नियम रहा , सब्त के दिन वह हुआ गवा । तीन सप्ताह तक उ के प्रति सब्त वहाँ जात रहा उ आराधकों को समझाया कि धर्मशास्त्र में लिखा है कि यीशु मसीहा हे
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वह धर्मशास्त्र से दिखाईस कि भविष्यद्वक्ताओं ने लिखा है कि मसीह का मर कय फिर जीवित होई है। उसने कहा, " इ मनई यीशु ही मसीह है। उ मर गया, लकिन फिर जी उठा, ठीक जय जिया से भविष्यद्वक्ता ने लिखा हे "
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हूवं उपस्थित यहूदियों में से कुछ ने पौलुस की बात पर विश्वास करीन आउर पौलुस एवं सीलास से भेंट करी लगे। उनके मध्य अनेक गैर-यहूदी और प्रतिष्ठित स्त्रियां भी थी जेसे यीशु के संदेश को ग्रहण किया और वे भी पौलुस एवं सीलास से भेंट करने लगे
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परन्तु यहूदियों के कुछ प्रमुख जन बहुत रूष्ट थे क्योंकि अनेकों ने पौलुस कय बात पय विश्वास किहिन । तब वय सबही चौक मा जाई कुछ दुष्टों को भड़काया कि वे उनके पीछे जाय। इस तरह यहूदियों के आवारो सब जने ने भीड़ एकत्र करके हंगामा खड़ा किहिन । यहूदियन तथा अन्यों की यह भीड़ यासोन के घर पर चढ़ गई जहा पौलुस आउर सीलास ठहरे हुए थे। वे पौलुस और सीलास कय भीड़ मा खींचकय लावा चाहत रहे ,
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लकिन उनका चला कि पौलुस और सीलास घर में नहीं हैं तो उन्होंने दासों को ही पकड़ लिया और उसके साथ उपस्थित अन्य विश्वासियों को खींचकर नगर प्रशासकों के समक्ष लाये। उन्होंने कहा, "संसार में सब तरफ हंगामा फैलाने वाले मनुष्य हमारे यहाँ भी आ गए वय
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आउर इस मनुष्य यासोन ने उन्हें अपने घर में ठहराया है। वे सम्राट के विरूद्ध कार्यकारी हैं। वे कहते हैं कि राजा कोई और है जिसका नाम यीशु कहिन
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यही कारण विश्वासियों ने पौलुस आउर सीलास को रातोंरात
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थिस्सनुलीके से विदा किया। वे बिरीया पहुँचे आउर हुआ भी यहूदियों के आराधनालय में गये। थिस्सलुनीके में अधिकांश यहूदी परमेश्वर के सन्देश को सुनने के इच्छुक नहीं थे परन्तु बिरीया के रहने वाले यहूदियों ने सुनने की इच्छा प्रकट की और ध्यानपूर्वक यीशु के सन्देश को सुना। वे प्रतिदिन धर्मशास्त्र पढ़ते थे कि देखें पौलुस ने जो कुछ कहा वह सच
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है। पौलुस की शिक्षा के कारण अनेक यहूदियों ने और कुछ प्रतिष्ठित गैर यहूदी स्त्रियों ने तथा अनेक गैर यहूदी मनई ने यीशु पर विश्वास किहिन
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लकिन जब थिस्सलुनीके के यहूदियों को समाचार मिला कि पौलुस बिरीया में यीशु के बारे में परमेश्वर का सन्देश सुना रहा है तब उन्होंने बिरीया में आकर पौलुस की बुराई की जिसके कारण वहाँ की जनता पौलुस से क्रोधित हो गई।
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बिरीया के कुछ विश्वासियों ने पौलुस को समुद्र के किनारे से विदा करय आये लकिन सीलास आउर तीमुथियुस बिरीया में ही रहे
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समुद्र तट पर पहुंचकर पौलुस आउर अन्य विश्वासी नाव के द्वारा एथेन्स पहुँचे पौलुस ने साथ आने वालों से कहा, "सीलास और तीमुथियुस से कहना कि वे यथासंभव शीघ्र अति शीघ्र यहाँ मेरे पास आ जायें।" एथेन्स से कूच करके वे विश्वासी बिरीया आये गये
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एथेन्स में पौलुस ने सीलास आउर तीमुथियुस के आने की प्रतीक्षा की। इस बीच वह नगर का भ्रमण करता रहा। उस नगर में अनेक मूर्तियों को देखकर वह विचलित हो गया।
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अतः वह यहूदियों के आराधनालय में गया और यहूदियों के मध्य यीशु की चर्चा की और उन यूनानियों से भी जिन्होंने यहूदी विश्वास को ग्रहण किया था। वह प्रतिदिन सार्वजनिक चौक में भी जाता था और मनुष्यों से भेंट करके बातें करत रहा
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हुआ पौलुस की भेंट कुछ शिक्षकों से हुई जिनकी रूचि मनुष्यों के विश्वास पर चर्चा करने की थी। मनुष्य उनमें से कुछ को एपिक्यूरसपंथी (आनन्दोपासक) और कुछ को स्टोइकपंथी (सुख-दुख के प्रति उदासीन) कहते थे। उन्होंने पौलुस को अपने विचार सुनाये और पौलुस से उसके विचार सुनना चाहे। उनमें से कुछ ने आपस में कहा, "वह किसी अनजान परमेश्वर की चर्चा कर रहा है।" क्योंकि पौलुस कहता था कि यीशु मर गया था और फिर जीवित हो गये
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तब उ उनका उस स्थान में ले गये जहाँ नगर के प्रधान बैठते थे। वहाँ पहुंचकर उन्होंने पौलुस से कहा, "कृप्या हमें बता कि यह कौन सा नया सन्देश है जो तू मनुष्यों को सुनाता है?
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तू कुछ ऐसी शिक्षा देता है जिसे हम समझ नहीं पाते हैं। अतः हम समझना चाहते हैं कि तू क्या कहना चाहता
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है।" एथेन्स वासी तथा वहाँ रहने वाले परदेशी भी किसी भी नई बात के बारे में परिचर्चा करने के इच्छुक रहते थे।
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तब पौलुस ने उनके बीच खड़े होकर कहा, "एथेन्सवासियों, मैं देखता हूं कि तुम लोग बहुत धर्मी हो।
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यह मैं इस कारण वत हूं कि आते-जाते मैंने तुम्हारी पूजा की वस्तुओं को देखा। मैंने एक ऐसी वेदी भी देखी जिस पर किसी ने लिखा था," "अज्ञात परमेश्वर के सम्मान में।" अतः मैं तुम्हें उस परमेश्वर के बारे में बताऊंब जेके तू बिनती प्राथना करत हे लकिन उसे जानते नही
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आउर वही परमेश्वर है जे पृथ्वी का बनाये बय आउर जेका कुछ उसमें है उसे भी बनाये हे उ आकाश और पृथ्वी के सब प्राणियों पर राज करता है और मनुष्यों के बनाये हुए मंदिरों में वास नहीं करत हे
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वह मनई द्वारा उसके लिए बनाई वस्तुओं की लालसा नहीं करता है क्योंकि वह मनुष्यों को जीवन एवं सांस देत हे और सब आवश्यकता की वस्तुएं देता हें
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सुरु मा परमेश्वर ने एक दंपत्ति की रचना की थी और उसे सब मनई को उत्पन्न किया जो आज पृथ्वी पर विभिन्न जातियों के रूप में वास करते हैं। उन्हें उनके समय के लिए यथास्थान रखा। वह चाहत रहा है कि मनई का वकर आवश्यकता का बोध हो तो वे उसकी खोज करेंगे
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आउर उसे पायेंगे। परमेश्वर चाहत है कि हम उसे खोजें जबकि वह हमरे अत्यधिक नगीच है
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परमेश्वर ही कय द्वारा है कि हम जीवित रहती हे, चलते-फिरते हैं और अस्तित्व में हैं जई से तुम में से किसी ने कहा हे (क्योंकि हम उसकी सन्तान हैं।)
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आउर हम परमेश्वर कय बत्तवा हैं यही मारे हम यह न सोचें कि परमेश्वर मनई द्वारा सोने-चांदी या पत्थर मा काटा गया कवनव रूपनहीं हे
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जब मनुष्य नहीं मनई था कि परमेश्वर उनसे क्या चाहत रहा है तब परमेश्वर ने उनके काम का उन्हें दण्ड नहीं दिहिस ।लकिन अब परमेश्वर ने सब मनुष्यों को, सब जगह यह आज्ञा दी है कि उ अपने बुरे कामों का त्याग करो ।
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वह कहता है कि उसने एक दिन निश्चित किया है जब अपने एक चुने हुए मनुष्य द्वारा हम सब का न्याय करेगा, उसने सुनिश्चित किया कि इस मनुष्य को मृतकों में से पुनर्जीवित करने से हम इस बात को समझ बुझ ले
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पौलुस से सुनकय कि कोई मरय के बाद फिर जीवित हो गया, उ उस पय हंसए लगे। लकिन कुछ लोग उससे कहय लगे कि वह फिर किसी दिन आए और इस विषय पर चर्चा करे।
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यह सुनकर पौलुस चला गया।
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परन्तु कुछ लोग पौलुस के साथ गए और यीशु के सन्देश पर विश्वास किया। यीशु में विश्वास करने वालों में दियुनुसियुस नामक एक पुरूष था। एक स्त्री भी थी जिसका नाम दमरिस था तथा अन्य भी थे।